2006 के पुनर्वास पैकेज एवं वर्ष 2014 की अतिरिक्त सहायता के क्रियांवायन एवं यदि कोई परिवार वंचित रह गया हैं उनके लिए राज्य मानवाधिकार आयोग में सिखों के लिए विशेष राहत देने के लिए हरिद्वार के एडवोकेट श्री भदौरिया एवं कुछ अन्य के द्वारा की गई एक याचिका दायर ।

हरिद्वार 3 नवंबर । सन 1984 में प्रधानमंत्री तत्कालीन श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में निर्दोष सिख नागरिकों के विरुद्ध बहुत ज्यादा हिंसा हुई और इस हिंसा में हजारों निर्दोष व्यक्तियों की हत्या की गई, महिलाओं और बच्चों को गंभीर पीड़ा पहुंचाई गई ।सिख समुदाय के अनेक परिवारों की संपत्ति आजीविका और सामाजिक सुरक्षा नष्ट हो गई और यह घटना भारतीय लोकतंत्र ,मानव गरिमा तथा नागरिकों के जीवन एवं स्वतंत्रता के अधिकार पर गंभीर आघात था ,इस तथ्य को देखते हुए हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट ,कमल भदोरिया एडवोकेट ,सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत, शाहनवाज मलिक LLB अध्यनरत, श्रीमती रेखा पांडे एडवोकेट के द्वारा एक याचिका राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार ,प्रमुख सचिव गृह विभाग उत्तराखंड शासन, प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग उत्तराखंड, प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को पक्ष कार बनाते हुए दायर की गई है जिसमें जानकारी दी गई है कि वर्ष 1984 में उत्तराखंड का क्षेत्र तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य का हिस्सा था ,इस क्षेत्र में निवास करने वाले सिख नागरिकों तथा वर्तमान उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से संबंधित परिवारों के साथ उक्त हिंसा के परिणाम स्वरुप गंभीर क्षति हुई ,भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी 2006 को वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों के लिए एक पुनर्वास पैकेज घोषित किया गया था कि दंगों में मृत्यु होने की स्थिति में मृतक के परिवार को 3,50,000 रुपये और घायल व्यक्तियों के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार 1,25000 और मृतकों की विधवाओं तथा वृद्ध माता-पिता के लिए ₹2500 प्रति माह पेंशन का प्रावधान किया गया सन 2014 में इन सभी पैकेजों के अतिरिक्त₹500000 मुआवजे की घोषणा की गई तथा दिनांक 16. 12. 2014 को वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए प्रत्येक पात्र व्यक्ति के निकटतम कानूनी वारिस को पहले से निर्धारित सहायता के अतिरिक्त₹500000 की बड़ी ही अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया गया, इस संबंध में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने सन 2021 में उत्तराखंड सहित नौ राज्यों से सन 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित समस्त परिवारों के विस्तृत जानकारी मांगी थी और जब यह जानकारी दी गई तो उन राज्यों में उत्तराखंड राज्य भी शामिल था और उनके द्वारा प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी नीति नहीं अपनाई गई थी और इस 1984 की घटना को गंभीर मानते हुए घटना के लगभग चार दशक बाद भी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के संबंध में उत्तराखंड राज्य की नीति एवं वास्तविक कार्रवाई स्पष्ट नहीं हुई है जिन परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य पिता, पति ,पुत्र को खोया उनके समक्ष जीवन भर आर्थिक संकट बच्चों की शिक्षा रोजगार आवास एवं सामाजिक सुरक्षा की समस्याएं लगातार बनी रही है इसलिए जो प्रभावित परिवार है उनके दावों की पुन: जांच सही उत्तराधिकारियों की पहचान और उचित राहत प्रदान किया जाना न्यायचित अपनी याचिका में बताया गया है और भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट द्वारा राज्य मानवाधिकार आयोग से यह मांग की गई है कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार एक सरकारी नौकरी उनके परिवार के रोजगार को देखते हुए दी जाए ,यदि पात्र व्यक्ति की मृत्यु अथवा अधिक आयु के कारण भरती की शर्त संभव न हो तो परिवार के अन्य पात्र सदस्य को रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, आर्थिक पुनर्वास देने हेतु राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट रिपोर्ट मांगी जाए कि उत्तराखंड राज्य के कितने सिख नागरिकों की मृत्यु हुई तथा वर्तमान उत्तराखंड के कितने निवासी जिनके हिंसा में मृत्यु अन्य राज्यों में हुई प्रत्येक परिवार के संबंध में यह विवरण प्राप्त किया जाए, वर्ष 2006 के पुनर्वास पैकेज के अंतर्गत 3,50,000रुपए की सहायता दी गई या नहीं तथा वर्ष 2014 के निर्णय के अनुसार अतिरिक्त ₹500000 की सहायता दी गई अथवा नहीं चिन्ह पात्र परिवारों को निर्धारित मुआवजा आज तक प्राप्त नहीं हुआ है उन्हें सभी उपलब्ध अभिलेख एवं साक्षय के सत्यापन के उपरांत सहायता का भुगतान के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए, वर्ष 1984 के सिख दंगों में सरकारी सेवा में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष पुनर्वास एवं भर्ती नीति तैयार करें , केंद्र सरकार के वर्ष 2006 के पुनर्वास पैकेज के अनुरूप प्राथमिकता आयु में उचित छूट एवं विशेष भरती अभियान हेतु राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए ,वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित उत्तराखंड के सभी परिवारों का जनपद बार एवं परिवार वार विवरण प्राप्त किया जाए और पेंशन के संबंध में भी प्राप्त हुई या नहीं इसकी जांच कराई जाए ,प्रत्येक जनपद में एक विशेष सत्यापन समिति गठित हो ,जिसमें जिला प्रशासन ,पुलिस विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, प्रभावित सिख समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हो, वर्ष 2006 के पुनर्वास पैकेज एवं वर्ष 2014 की अतिरिक्त सहायता के क्रियांवायन में राज्य स्तर पर क्या-क्या कार्रवाई हुई, यदि कोई परिवार वंचित रह गया हो तो उसके क्या कारण थे इन सभी तथ्यों के आधार पर राज्य मानवाधिकार आयोग में सिखों के लिए विशेष राहत देने के लिए यह याचिका दायर की गई है ।

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