काशीपुर 28 सितंबर। गन्ना कृषकों के गन्ने की फसल की सुचारू एवं सामयिक आपूर्ति कराये जाने के लिए पेराई सत्र 2026-27 हेतु गन्ना आपूर्ति एवं सट्टा नीति जारी की गई है। श्री त्रिलोक सिंह मर्तोलिया आयुक्त गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, उत्तराखण्ड द्वारा बताया कि पेराई सत्र 2026-27 में 84196 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना बुवाई की गई है। पेराई सत्र 2025-26 में राज्य की चीनी मिलों द्वारा 300.69 लाख कुंतल गन्ना पेराई करते हुए 29.16 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया गया तथा 1 लाख 11 हजार गन्ना कृषकों द्वारा चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की गई।
इस वर्ष सट्टा नीति में समस्त वर्ग की महिलाओं को गन्ने की खेती के प्रति रूझान बढाने के लिए पेराई सत्र के प्रारम्भ से ही गन्ना आपूर्ति में 20 प्रतिशत की सुविधा दी गई है। गन्ना समितियों में नये सदस्य दिनांक 31 अक्टूबर, 2026 तक बनाये जायेंगे। सट्टा नीति में छोटे किसानों के लिए दो श्रेणियां बनाई गई हैं, श्रेणी-अ में 99 कुंतल तक के कृषक और श्रेणी-ब में 100 से 144 कुंतल तक के, छोटे किसानों की गन्ना आपूर्ति 02 पखवाड़ों में कराई जायेगी। गन्ना किसानों के गन्ने की आपूर्ति के दृष्टिगत गन्ना पर्ची पर निर्धारित वजन के 20 प्रतिशत अधिक सीमा तक तौल में छूट प्रदान की गई है। सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं उनके उत्तराधिकारियों को पेराई सत्र प्रारम्भ से ही गन्ना आपूर्ति में 20 प्रतिशत की प्राथमिकता दी जायेगी। समानुपातिक खरीद सुनिश्चित कराये जाने के लिए क्रय केन्द्र तभी बन्द किया जायेगा जबकि कलेण्डर में अंकित सभी कृषकों की पर्चियां जारी हो चुकी हों।
गन्ना समितियों द्वारा गन्ना किसानों को उनके कलेण्डर, सट्टा एवं पर्ची की जानकारी दिये जाने हेतु कृषक सेवा केन्द्र संचालित किये जायेंगे। चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को नियमानुसार गन्ना मूल्य का भुगतान किया जायेगा। गन्ना आपूर्ति सम्बन्धी शिकायतों के शीघ्र निराकरण हेतु सहायक गन्ना आयुक्त द्वारा प्रत्येक समिति क्षेत्र में शिकायत अधिकारी नियुक्त किया जायेगा, जो समयान्तर्गत गन्ना किसानों की शिकायतों का निराकरण करेगा।







