7 जून। वर्तमान में अभियुक्तगण द्वारा डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड तथा अन्य साइबर अपराधों के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों के लोगों के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की जा रही थी। साइबर अपराध से अर्जित धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से प्राप्त कर उसे छिपाने, स्थानांतरित करने एवं वास्तविक अपराधियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से म्यूल अकाउंट्स का उपयोग किया जा रहा था।”
*साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते किराये पर प्रयोग करने के लिए उपलब्ध कराने वालों पर साथ ही लोगों को कुछ पैसे देकर बैंक अकाउंट खुलवाने वालों पर स्पेशल टास्क फोर्स करेगी कानूनी कार्यवाही:एसएसपी stf*
मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के निर्देशन एवं पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड के मार्गदर्शन में **वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा साइबर अपराधों में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट्स के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई हेतु अपनी साइबर टीम को संदिग्ध खातों के सत्यापन एवं विस्तृत वित्तीय विश्लेषण के निर्देश दिए गए थे। उक्त निर्देशों के क्रम में सीसीपीएस टीम द्वारा प्राप्त इनपुट्स, बैंकिंग अभिलेखों, केवाईसी दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों एवं मनी ट्रेल का गहन परीक्षण किया गया। सत्यापन के दौरान म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से साइबर अपराध से अर्जित धनराशि की लेयरिंग एवं वितरण किए जाने के पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने पर संबंधित अभियुक्तों के विरुद्ध थाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में विधिक कार्रवाई करते हुए एफआईआर पंजीकृत की गई* ।* साइबर टीम द्वारा इकाई द्वारा की गई गहन वित्तीय एवं तकनीकी जांच में साइबर अपराधियों को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का संचालित होना प्रकाश में आया है.
जांच के दौरान NCRP पोर्टल, CFCFRMS, I4C Inputs, बैंकिंग अभिलेखों, KYC दस्तावेजों, ATM/POS/UPI ट्रांजेक्शन विवरण एवं Money Trail Analysis का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि देश के विभिन्न राज्यों में घटित डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों से अर्जित धनराशि एक बैंक खाते में प्राप्त की जा रही थी।
वित्तीय विश्लेषण से यह तथ्य प्रकाश में आया कि खाते में प्राप्त धनराशि को तत्काल विभिन्न बैंक खातों, ATM निकासी, POS ट्रांजेक्शन एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से कई स्तरों (Multi-layer Transactions) पर स्थानांतरित किया गया, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचने वाली मनी ट्रेल को जटिल बनाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि खाताधारकों द्वारा बैंक खाते, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड एवं इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जा रहे थे, जिनका उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच एवं उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि अभियुक्त साइबर अपराध से अर्जित धनराशि के Collection, Concealment, Layering एवं Distribution में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे तथा आर्थिक लाभ एवं कमीशन प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने बैंक खातों एवं बैंकिंग संसाधनों का उपयोग अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे।
उक्त तथ्यों के आधार पर थाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में अभियुक्तों के विरुद्ध संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए साइबर अपराध से अर्जित धनराशि की लेयरिंग, मनी ट्रेल को छिपाने एवं वास्तविक अपराधियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में एफआईआर पंजीकृत की गई है। अभियुक्तों के विरुद्ध साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन पर FIR NO. 32/2026 धारा 112(2), 318(4), 61(2), 3(5) तथा 66C/66D IT ACT के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। मामले में अन्य संदिग्ध व्यक्तियों एवं बैंक खातों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
एसटीएफ उत्तराखण्ड आमजन से अपील करता है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड अथवा इंटरनेट बैंकिंग सुविधा उपयोग हेतु उपलब्ध न कराएं। कमीशन या लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराना भी अपराध है तथा ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है।







