मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने की शिष्टाचार भेंट।

देहरादून 14 जुलाई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश महिला मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को उनके पाँच वर्ष के सफल एवं जनसेवा को समर्पित कार्यकाल के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर प्रदेश एवं राज्य के समग्र विकास, महिला सशक्तिकरण तथा महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक भागीदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसी भी राज्य और राष्ट्र की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं मानी जा सकती, जब तक महिलाओं को समान अवसर, सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का वातावरण उपलब्ध न हो। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर अनेक ऐतिहासिक योजनाएँ संचालित की गई हैं। इन योजनाओं ने करोड़ों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है तथा महिलाओं को विकास यात्रा का सहभागी बनाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने महिलाओं के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। विशेष रूप से उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को इसका सर्वाधिक लाभ मिला है। पहले महिलाओं को जंगलों से लकड़ी लाने में कई घंटे लगाने पड़ते थे। धुएँ से भरे चूल्हों पर भोजन बनाने के कारण उन्हें आँखों एवं श्वास संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई गैस उपलब्ध होने से महिलाओं को धुएँ से मुक्ति मिली, उनका समय बचा और स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब वे अपने समय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, स्वरोजगार, कृषि, स्वयं सहायता समूहों और अन्य रचनात्मक कार्यों में कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक घर में शौचालय निर्माण की ऐतिहासिक पहल ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को नई पहचान दी है। ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं को खुले में शौच के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, जिससे उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आज घर-घर शौचालय बनने से महिलाओं का सम्मान बढ़ा है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई है तथा स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के माध्यम से हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने का अभियान भी महिलाओं के जीवन में परिवर्तन का बड़ा माध्यम बना है। विशेषकर उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएँ प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर से सिर पर पानी ढोकर लाती थीं। इससे उनका अत्यधिक समय और श्रम व्यय होता था। आज घर-घर नल से जल उपलब्ध होने से महिलाओं के श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है तथा उन्हें परिवार, बच्चों की शिक्षा, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है। यह योजना पर्वतीय महिलाओं के जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने का कार्य किया है। अनेक आवास महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त स्वामित्व में दिए जाने से उनके सामाजिक और आर्थिक अधिकार भी मजबूत हुए हैं। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं, जिसका सबसे अधिक लाभ महिलाओं और बच्चों को मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुकन्या समृद्धि योजना ने बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, जन धन योजना, डिजिटल इंडिया तथा विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों ने लाखों महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने का कार्य किया है। आज देश की महिलाएँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सहभागी और नेतृत्वकर्ता बन रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार भी महिलाओं के सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे प्रत्येक क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करते हुए उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिक भागीदारी सुनिश्चित की है। इससे बड़ी संख्या में महिलाएँ जनप्रतिनिधि बनकर विकास कार्यों का नेतृत्व कर रही हैं। निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में व्यापक बदलाव आया है। आज हजारों महिलाएँ समूह बनाकर कृषि, बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, स्थानीय खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प, हथकरघा, जड़ी-बूटी आधारित उत्पाद, ऊनी वस्त्र, रिंगाल शिल्प, मधुमक्खी पालन तथा अनेक स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ी हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “लखपति दीदी” अभियान उत्तराखण्ड की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राज्य सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को वार्षिक एक लाख रुपये अथवा उससे अधिक आय अर्जित करने योग्य बनाना है। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन, आधुनिक तकनीक तथा उत्पादों की ब्रांडिंग की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूत कर रही है। आज उत्तराखण्ड की युवा महिलाएँ कृषि आधारित स्टार्टअप, फूड प्रोसेसिंग, ऑर्गेनिक उत्पाद, पर्यटन, होम-स्टे, डिजिटल सेवाओं, हस्तशिल्प, ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित कर रही हैं। सरकार उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग, नवाचार और विपणन के अवसर उपलब्ध करा रही है ताकि वे रोजगार प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बन सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए मोटे अनाज आधारित खाद्य पदार्थ, मंडुवा, झंगोरा, स्थानीय दालें, पहाड़ी मसाले, बुरांश उत्पाद, जड़ी-बूटी आधारित सामग्री, हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र, प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद तथा अन्य स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इन उत्पादों को मेलों, प्रदर्शनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विभिन्न विपणन माध्यमों के जरिए देशभर में पहचान मिल रही है। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखण्ड की पारंपरिक संस्कृति, लोककला और स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति सदैव परिश्रम, त्याग और आत्मबल की प्रतीक रही है। पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं ने कठिन परिस्थितियों में परिवार, कृषि, पशुपालन, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जीवन को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार उनकी मेहनत और योगदान का सम्मान करते हुए ऐसी नीतियाँ बना रही है, जिनसे उनका जीवन अधिक सरल, सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब महिलाएँ शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी, तभी समाज और राज्य का समग्र विकास संभव होगा। राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “महिला नेतृत्व में विकास” के विजन को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड की प्रत्येक बेटी, बहन और मातृशक्ति को समान अवसर, सम्मान और प्रगति का वातावरण उपलब्ध हो तथा वे विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों से महिलाओं के जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन आया है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, विकास और महिला कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें पाँच वर्ष के सफल कार्यकाल के लिए पुनः शुभकामनाएँ दीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here