राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण मानकों में ढील दे सरकार : नेगी (अध्यक्ष ,,,जन संघर्ष मोर्चा)

विकास नगर 30 अक्टूबर। जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि सरकार जोर-शोर से राज्य गठन की रजत जयंती मनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन राज्य गठन का असली मकसद आज भी कोसों दूर है। प्रदेशवासी खासतौर पर राज्य गठन के पुरोधा आंदोलनकारी आज भी खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। नेगी ने कहा कि जिन आंदोलनकारियों की बदौलत राज्य का गठन हुआ, आज वही आंदोलनकारी चिन्हीकरण के कड़े मानकों की वजह से चिन्हीकरण से वंचित हैं।
सरकार द्वारा चिन्हीकरण हेतु पांच बिंदु तय किए गए हैं, जिनमें आंदोलन के दौरान एफआईआर (जेल/ गिरफ्तारी का सर्टिफिकेट), आंदोलन के दौरान चोट लगने का मेडिकल सर्टिफिकेट, जिलाधिकारी द्वारा प्रदत पुष्ट प्रमाण, एलआईयू आदि का प्रमाण पत्र, पुलिस केस डायरी आदि मानक तय किए गए हैं।
कई कर्मठ आंदोलनकारियों ने आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया था, लेकिन उनके पास पुष्ट दस्तावेज न होने के कारण आज तक चिन्हीकरण नहीं हो पाया। नेगी ने कहा कि जो सपना राज्य के लोगों ने खास तौर पर आंदोलनकरियों ने देखा था ,वह सपना तब चकनाचूर हो गया जब एक प्रधान न बनने की हैसियत रखने वाला मिनिस्टर, चीफ मिनिस्टर, विधायक, सांसद बन गया तथा वहीं फोर्थ क्लास की हैसियत न रखने वाला चालबाज सेटिंग- गेटिंग, पैसों के दम पर आज उच्च पदों पर बैठा है तथा वहीं दूसरी ओर काबिल व उच्च शिक्षित युवा 8-10 हजार की नौकरी के लिए दर- दर की ठोकरें खा रहा है।
इन 25 सालों में नौकरियां बिकने लगी, भ्रष्टाचार ने पूरे प्रदेश को अपनी गिरफ्त में ले लिया, बदमाशों/ माफियाओं का साम्राज्य स्थापित हो गया, नाकाबिल मंत्री/ विधायकों की वजह से अफसर शाही हावी हो गई । गरीब व्यक्ति आज भी शिक्षा/ चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। नेगी ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान उत्तराखंड के मूल निवासियों को हुआ, जो जमीन आज 10-20 लाख रुपया प्रति बीघा होनी चाहिए थी वो 2-3 करोड रूपए बीघा हो गई तथा पहाड़ों से पलायन करने वाले उत्तराखंड के मूल निवासी महंगे दामों में खरीदने को मजबूर हैं।
नेगी ने कहा कि अगर शीघ्र ही सरकार ने चिन्हीकरण मानकों में ढील नहीं दी तो मोर्चा आंदोलन करेगा।
पत्रकार वार्ता में – मोर्चा महासचिव आकाश पंवार व विजयराम शर्मा मौजूद थे।

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