देवभूमि उत्तराखंड के देहरादून में एक नन्हा किशोर 60 किलोमीटर की कावड़ लेकर आया।

देहरादून 22 जुलाई। बीते कल 21 जुलाई की श्याम हमें देहरादून के घंटाघर के चकराता रोड पर दो भोले कावड़ ले जाते हुए मिले।

उनमें से के पिता थे दूसरा उनका पुत्र जिसकी उम्र मात्र 10 वर्ष है , बातचीत के दौरान इनमें से एक छोटे भोले ने बताया कि उसको कावड़ ले जाने की इच्छा 1 वर्ष हुई . जब वह कावड़ के दौरान अपनी मौसी के साथ हरिद्वार आया था , तभी उसने ठान लिया था कि वह अगले बरस स्वयं कावड़ लेकर आएगा ।
यहां बात केवल कावड़ ले जाने की नहीं है वरन् उस बच्चों की इच्छा शक्ति की है कि जिस उम्र में अर्थात बाल्य काल में बच्चों का मन खेलने, कूदने मस्ती के अलावा किसी और विषय वस्तु या कार्य में रुचि लेता हुआ नहीं दिखता।
लेकिन इस बच्चे “मास्टर” प्रतीक सिंह ने अपने कोमल और नटखट मन में दृढ़ निश्चय के साथ ठाना। और भोले नाथ की कृपा से अगले ही वर्ष अपने नाना श्री अशोक थापा जोकि देश के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान द दून स्कूल में पेशेवर तैराक हार्ड के पद से सेवानिवृत है से कावड़ से संबंधित सभी प्रकार के नियमों की जानकारी प्राप्त कर अपने पिता गजेंद्र सिंह के संरक्षण, सहयोग एवं मार्ग दर्शन में उनका साथ प्राप्त कर देहरादून से हरिद्वार पहुंचा। वहां पहुंचने के उपरांत वहां से कावड़ में जल भर कर 19 जुलाई को देहरादून से और 20 जुलाई सुबह 3 बजे से पैदल यात्रा शुरू, कर एक शाम को भानियावाला में विश्राम कर 21 जुलाई की सुबह 6 बजे से पुण्य पवित्र पैदल यात्रा शुरू कर कल 21 जुलाई की शाम को 8.30 बजे से टपकेश्वर मंदिर में महादेव पर पवित्र जल अर्पित कर अपनी यात्रा संपूर्ण करना निश्चित किया है, इसी दौरान कुछ किलोमीटर पूर्व हमसे मुलाकात करने के लिए रुका।
इस दौरान उसने बताया कि उसे क्षण भर भी इस बात का अफसोस नहीं हुआ कि उसने इतना बड़ा प्रण क्यों ले लिया ।
उस बच्चों की इच्छा शक्ति ऐसी थी की अच्छे अच्छों के रोंगटे खड़े हो जाएं एवं पसीने छुड़ा दे।
उसे बच्चों ने कर दिखाए अपने दृढ़ निश्चय और सनातन के प्रति आस्था का सम्मान रखते हुए एक कीर्तिमान स्थापित किया।
यदि ऐसे ही बच्चे देश भर में और भी ऐसी पवित्र सोच के साथ आगे आएं,, जिनमें की बहुत सारे ऐसे और बच्चे हैं जो देश के विभिन्न क्षेत्रों से कावड़ में जल लेने के लिए पवित्र महीने सावन में हरिद्वार आते हैं , तो देश में ऐसी प्रेरणाओं के साथ सनातन के गौरव का परचम और भी बुलंद तरीके से लहराएगा।

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